डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण में आर्य: विदेशी नहीं, भारत के मूलनिवासी
भारत के महान समाज सुधारक और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहरे प्रभाव डालते हैं। एक महत्वपूर्ण मुद्दा जिस पर उन्होंने स्पष्ट और सटीक विचार व्यक्त किए हैं, वह है आर्य जाति का इतिहास। आजकल कुछ लोग आर्य जाति को विदेशी मानते हैं, लेकिन डॉ. अंबेडकर ने इस विचार को पूरी तरह नकारा है। उनका मानना था कि आर्य भारत के मूलनिवासी थे और उनके आक्रमणकारी होने का कोई प्रमाण नहीं है। आइए जानते हैं डॉ. अंबेडकर के विचारों के आधार पर इस बात को।
1. आर्य कोई विदेशी जाति नहीं थे 📜
डॉ. अंबेडकर ने अपने ग्रंथ अंबेडकर संपूर्ण वांग्मय खंड 7 के पृष्ठ 321 पर लिखा है:
“यह सोचना गलत है कि आर्य आक्रमणकारियों ने शूद्रों पर विजय प्राप्त की। इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता कि आर्य भारत के बाहर से आए और उन्होंने यहां के मूलनिवासियों पर आक्रमण किया।”
उनके अनुसार, ऋग्वेद और अन्य वेदों में इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि आर्य विदेशी थे। डॉ. अंबेडकर का मानना था कि आर्य भारत के ही मूलनिवासी थे।
2. आर्य और शूद्रों के संबंध 🤝
डॉ. अंबेडकर ने यह भी स्पष्ट किया कि शूद्र आर्य जाति के अभिन्न और सम्मानित सदस्य थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी शूद्रों को आर्य माना गया था। पृष्ठ 322 पर उन्होंने लिखा:
“शूद्र को आर्य स्वीकार किया था और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी उनको आर्य कहा गया है। शूद्र आर्यों के अभिन्न, जन्मजात और सम्मानित सदस्य थे।”
यह बताता है कि शूद्रों को आर्य जाति से अलग नहीं किया गया, बल्कि वे उसी समाज के अंग थे।
3. ऋग्वेद और आर्य का इतिहास 📚
डॉ. अंबेडकर की किताब शूद्र कौन थे? (पृष्ठ 52) में भी यह स्पष्ट किया गया है:
“ऋग्वेद में आर्य और दासों के युद्ध के बारे में कोई विशेष कथा नहीं मिलती, और न ही कोई ऐसा प्रसंग है जो यह प्रमाणित करता हो कि आर्य विदेश से आए थे।”
यह शब्द ऋग्वेद के इतिहास को स्पष्ट करते हैं, जिससे यह साबित होता है कि आर्य भारत में ही उत्पन्न हुए थे, न कि वे बाहरी आक्रमणकारी थे।
4. शूद्र और आर्य जाति का संबंध 🌟
डॉ. अंबेडकर की दूसरी पुस्तक शूद्रों की खोज में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि शूद्र आर्य जाति के सूर्यवंशी थे और भारतीय आर्यों में शूद्र क्षत्रिय वर्ण के थे। यह दृष्टिकोण भी इस बात को प्रमाणित करता है कि शूद्र आर्य जाति के अभिन्न हिस्सा थे।
निष्कर्ष ✨
डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार:
- आर्य विदेशी नहीं थे: वे भारत के मूलनिवासी थे और उनका आक्रमणकारी होना एक मिथक है।
- आर्य भारत के ही थे: उनके भारतीय होने के प्रमाण ऋग्वेद में मिलते हैं।
- शूद्र भी आर्य जाति के अंग थे: वे क्षत्रिय वर्ण के थे और आर्य जाति का अभिन्न हिस्सा थे।
इस प्रकार, डॉ. अंबेडकर के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि आर्य को विदेशी कहना या आक्रमणकारी मानना गलत है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि आर्य भारत के मूलनिवासी थे और उनका समाज एकजुट था, जिसमें शूद्र भी महत्वपूर्ण सदस्य थे।
अंत में, डॉ. अंबेडकर के मार्गदर्शन का पालन करते हुए हमें यह समझने की जरूरत है कि समाज के हर वर्ग को सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके विचारों को जानने और समझने से हम अपने समाज में सच्ची समरसता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
संदर्भग्रंथ और पुस्तकें:
- अंबेडकर सम्पूर्ण वांग्मय खंड 7
- शूद्र कौन थे
- शूद्रों की खोज – डॉ. भीमराव अंबेडकर










