आर्य समाज, सामाना वार्षिक उत्सव एवं
101 कुण्डीय महायज्ञ
दिनांक 27 नवंबर बुधवार से 1 दिसंबर रविवार 2024 तक
पावन सान्निध्य- सुश्री अंजलि आर्या जी
अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक महाउपदेशिका एवं क्रांतिकारी वक्ता
सत्संग स्वलः माता नैना आर्य धर्मशाला, सामाना
धर्माचार्य:- आचार्य मानसिंह आर्य जी
Ph.: 98143-48060, 98159-46723
आध्यात्मिक वैदिक दिव्य सत्संग
सर्वकामना सिद्धिदायक विश्वकल्याण महायज्ञ
दिनांकः 27 नवम्बर से 30 नवम्बर 2024 तक
प्रातः 7:15 से 10:00 बजे तक यज्ञ, ध्वजारोहण, भजन, दिव्य प्रवचन
रात्रि : 8:00 से 10:00 बजे तक भजन, दिव्य प्रवचन
दिनांकः 1 दिसम्बर रविवार 2024
101 कुण्डीय महायज्ञ एवं पूर्णाहुति प्रातः 8.15 से 10.00 बजे तक
संगीत, वैदिक प्रवचन एवं ब्रह्म आर्शीवाद प्रातः 10.00 बजे से 11.30 बजे तक

कार्यक्रम के पश्चात् ऋषि लंगर
इस धार्मिक समारोह में सम्मलित होने वाले अति विशिष्ट अतिथि :-
- डा. धर्मवीरा गांधी जी – Member Parliament, Patiala
- स. चेतन सिंह जी जोड़ामाजरा – MLA Samana & Ex. Cabinet Minister Punjab
श्री विजेन्द्र सिंगला जी- Ex. Member Parliament, Sangrur
- श्री अजय बांसल जी – MD, Gupta Threads, Samana
- श्री मदन लाल जी सिंगला- MD, Jyoti Cotspin Pvt. Ltd., Samana
- स. सुखविन्दर सिंह जी मन्कू – MD, Vishal Combines, Samana
- श्री जवाहर लाल जी गोयल – M/s. Uggar Sain Jawahar Lal, Samana
- श्री टेक चंद जी गोयल- S/o. Sh. Madan Lal (Bushehre Wale)
M/s. Fortune Industries, Ilasmati Rice Exporters
इस उपलक्ष्य पर
श्री अजय बांसल एवं श्री संजीव बांसल जी
की तरफ से माता-पिता जी की पवित्र याद में
आँखों का मुफ्त चैक-अप एवं ऑपरेशन कैम्प
दिनांक 27 नवंबर 2024 दिन बुधवार
समय सुबह 9.00 बजे से 1.00 बजे तक
पहुंच रहे माहिर डॉक्टर:
डा. भूपेश गर्ग, दृष्टि आंखों का हस्पताल, समाना
स्थानः माता नैना आर्य धर्मशाला, सामाना
शहर की सामाजिक एवं धार्मिक सहयोगी संस्थाएँ
- अग्रवाल गऊशाला, सामाना
- अनाथ गऊशाला, सामाना
- पंजाब सनातन महावीर दल, सामाना
- सहारा क्लब, सामाना
- रोटरी क्लब, सामाना
- ब्राह्मण सभा, सामाना
- बहावलपुर महासंघ, सामाना
- भारत विकास परिषद् सामाना
- कृष्णा ड्रामाटिक क्लब, सामाना
- लायंस क्लब, सामाना
- आढ़ती ऐसोसिऐशन, सामाना
- राईस मिलर्ज ऐसोसिऐशन, सामाना
- शिव शंकर यूथ क्लब, सामाना
- गुरु रविदास नौजवान सभा, सामाना
- प्रवासी मानव संस्था, प्रवासी भलाई मंच, सामाना
- डी.ए.वी. स्कूल, सामाना, कुलारां, ककराला, बादशाहपुर
- भट्ठा मालिक ऐसोसिऐशन, सामाना
- जय श्री राम मोर्निन्ग वॉक कमेटी, सामाना
- दुर्गा दल रामलीला मन्दिर, सामाना

स्वागत कर्ता:
प्रधान श्री यशपाल सिंगला (98143-48060)
मंत्री श्री नारायण दास (98159-46723)
श्री सुभाष सिंगला (06-463-30002)
कोषाध्यक्ष श्री राजेन्द्र गुप्ता,
श्री धर्मपाल आर्य, श्री राजेन्द्र प्रसाद
मंच संचालक श्री सुदर्शन छाबड़ा
श्रीमति आदर्श गोयल (प्रधाना) श्रीमति आशा बब्बर (मन्त्राणी) श्रीमति सीमा बब्बर एवं पिंकी रानी (कोषाध्यक्ष)
कार्यकरिणी सदस्य:-
ज्ञान गर्ग, गोबिंद बब्बर, विजय सिंगला, हर्ष सिंगला, राजेश गोयल, राकेश गोयल, जगदीश वर्मा, जगदीश शर्मा, हिताभिलाषी शर्मा, सुभाष PRTC, रविंदर वर्मा, राजेंद्र कुमार काका, अशोक मुनि, संजय बेदी, मनोज धीमान, विजय डाबर, डॉ. शाम लाल, विनोद अग्रवाल, राजेश धीमान, जीवन गोयल, धर्मिदर वर्मा, तरुण आर्य, सुभाष गोयल, कमल शर्मा
समस्त सदस्य स्त्री एवं पुरुष आर्य समाज, प्रिंसिपल रेखा सिंगला, अध्यापक एवम् विद्याथी, दयानन्द मॉडल हाई स्कूल, सामाना।
यजजाल बनाने के लिए सम्पर्क करें:
सीता राम गुप्ताः 98555-70290, अशोक गर्ग: 76961-89090, सतीश गोयल: 70096-31073

आर्य समाज – विचार
सृष्टि के प्रारम्भ में मनुष्य के कल्याण के लिए जो ज्ञान परमेश्वर ने दिया है, उसी ज्ञान का नाम वेद है। यह ज्ञान परमात्मा चार ऋषियों के हृदयों में प्रकाशित करते हैं। फिर वे ऋषि उस ज्ञान का उच्चारण सर्व प्रथम जिनको करते हैं, उनका नाम ब्रह्मा जी होता है। ब्रह्मा जी से वेदों के ज्ञान के प्रचार प्रसार की परम्परा प्रारम्भ हो जाती है। गीता में भी कहा है कर्म की उत्पत्ति ब्रह्म-वेद से हुई और वेद ईश्वर से उत्पन्न हुए हैं। सृष्टि के समय से महाभारत युद्ध के समय तक वेदों के प्रचार प्रसार का कार्य वेद वेत्ता ऋषियों के द्वारा होता रहा, तब तक संसार में वेद विरुद्ध कोई मत उत्पन्न नहीं हुआ। परन्तु महाभारत के युद्ध के पश्चात वेदों के प्रचार का कार्य कम होता गया। कम होते होते वेदज्ञान लुप्त प्रायः हो गया और संसार में वेद विरुद्ध अनेकों मत उत्पन्न हो गये। वेद विद्या का लोप होने से सर्वत्र अविद्या रुपी अन्धकार फैल गया। धर्म के नाम पर अनेकों प्रकार की भ्रान्तियां फैला दी गई। वेदों के विषय में भी झूठी अफवाहें फैला दी गई कि वेदों कों तो शंकासुर नामक राक्षस ले गया तथा किसी ने कहा वेद गड़रियों का गीत है। ऐसे समय में भारत में एक महान आत्मा का प्रादुर्भाव हुआ जो महार्षि दयानन्द सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हुए। महार्षि दयानन्द ने बड़े कष्ट सहन करके भी वेदों के सत्य- सत्य ज्ञान को प्राप्त किया तथा वेदों के वास्तविक स्वरुप को जानकर स्वामी दयानन्द ने वेदों पर झूठे आरोपों तथा भ्रन्तियों का सप्रमाण खंडन करके, वेदों की प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने का साहसिक महान कार्य किया। “वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है” महर्षि की इस घोषणा ने समस्त बुद्धिमान मनुष्यों के मस्तिष्कों में एक हलचल पैदा कर दी एवं वेदों के विषय में सभी भन्तियों को भस्म करके उनका सत्य एवं शाश्वत स्वरुप सबके सामने उपस्थित किया।
वेद विरुद्ध अविद्या रुपी कीचड़ में धंसा फंसा मानव समाज देखकर उनके हृदय में बहुत पीड़ा होती थी। उनके हृदय में मनुष्यों को अविद्या रुपी अंधकार से बाहर निकालने के लिए उनके के प्रति सहानुभूति के भाव आते थे। इसीलिए उन्होंने वेदों के सत्य-सत्य ज्ञान को जन- जन तक पहुंचाने के लिए आर्य समाज की स्थापना की तभी से आर्य समाज वैदिक सभ्यता काल के ऋषियों मुनियों का अनुसरण करते हुए स्वामी दयानन्द जी के निर्देशानुसार वैदिक संस्कृति का प्रचार करने में सतत् प्रयत्नशील है। आर्य समाज समाना प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आपके सहयोग से वैदिक संस्कृति के प्रचार के लिए वेदज्ञान की कथा एवं यज्ञ का आयोजन कर रहा है। आप सभी धर्म प्रेमी, यज्ञ प्रेमी, महानुभाव सपरिवार इष्ट मित्रों सहित वेद प्रचार के उक्त कार्यक्रम में सादर आमन्त्रित है।
बहे सत्संग की गंगा
बहे सत्संग की गंगा, चलो हम भी नहा आयें। बुझी ज्योति जो जीवन की उसे फिर से जगा लाएं।। यही बेला है कर ले पान, प्यारे ज्ञान अमृत का। लगा है धर्म का मेला, अरे मन चल दिखा लायें।। तू ही योद्धा, तू ही योगी, तू ही है रूप सन्तों का। जिसे तू भूल बैठा है, उसे फिर से दिखा लाएं। भटकता फिर रहा दर-दर भुलाया नाम क्यो तूने। करे विश्वास जग तेरा, तुझे ऐसा बना लायें।।










