आर्य समाज के बलिदान
हिंदी रक्षा सचिव 1957
वीर सुमेरसिंह आर्य की जयंती पर श्रद्धांजलि
लेखक :- स्वामी नित्यानंद सरस्वती
फिरोजपुर की जेल का आंखों देखा अत्याचार ।
जुबां से गाया ना जाता ।।
चौबीस अगस्त को शाम के बजे थे सवाचार ।
वह हाल बताया ना जाता ॥१ ॥
सैंकड़ों सिक्ख आगये एकदम लेकर तरह-तरह के,
हथियारों का नाम गिनाया ना जाता ।।२ ।।
कुछ बैठे कुछ सोतों पर एकदम पड़ी मार ,
और वार बचाया ना जाता ।।३ ।।
बुड्ढे जवान साधु तक मार – मार दिए पसार ।
यह सार जताया ना जाता ॥४ ॥
पखानों में भी जा मारे बह चली थी खून की धार ।
वह वक्त भुलाया ना जाता ॥५ ॥
शिर फूटे , कहीं टूटे हाथ ऐसे होगए लाचार ।
भोजन खाया ना जाता ॥६ ॥
कुछ बचे कुछ जख्मी हो गये रोवें कर रहे हा – हाकार ।
धोया नहाया ना जाता ॥७ ॥
नित्यानन्द बाल-बाल बच गये,सुमेरसिंह गये स्वर्ग सिधार,
यह घाव मिटाया ना जाता ॥८ ॥
इस वर्तमान हरियाणा के लिए हिन्दी सत्याग्रह में 50 हजार आर्यसमाजियों ने जेले काटी थी। तब हरियाणा पृथक राज्य बना। आज ये राजनेता ही हरियाणा के चौधरी हो गए










