आर्य कुमारों यही व्रत धारो देश जगाना है।
आर्य कुमारों यही व्रत धारो
देश जगाना है।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
का दे रहा वेद इशारा।
उसे कार्य रूप में लाना है,
बस काम तुम्हारा।
चौबीस अक्षरी मन्त्र गायत्री,
सबको सिखाना है।।1।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
सब सत्य विद्या,
जो पदार्थ विद्या से जाने जाते।
उन सबका है आदि मूल,
परमेश्वर यह बतलाते।
जो पत्थर पूजें नाहक जूझें,
उन्हें समझाना है।।2।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
वेद का पढ़ना और पढ़ाना,
सुनना और सुनाना।
समझें इसको परम धर्म,
ना कोई करें बहाना।
जो ग्रंथ अशुद्ध हैं,
वेद-विरुद्ध हैं उनको हटाना है। ।3।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
पंच यज्ञ घर-घर में करना सीखें,
सब नर-नारी।
दुर्व्यसनों से दूर रहें,
हो सदाचारी उपकारी।
असली राह है यही भाई,
जहाँ तुम्हें जाना है।।4।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
चरित्र और आचार के पक्के,
रहें पाप से डर के।
भ्रष्टाचार का नाम न लें,
मिटे अन्याय विचर के।
कर्म से, मन से और वचन से,
हो एक दिखाना है।।5।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
मातृवत् परदारेषु पर
धन को मिट्टी जाने।
वैदिक शिष्टाचार न भूलें,
बरतें ढंग पुराने।
था यही गुण अन्दर-
जिससे ‘वीरेन्द्र’ झुका जमाना है।।6।।
आर्य बनाना है जी,
आर्य बनाना है।।
संस्कार ही मानव के आचरण की नींव होता है। जितने गहरे संस्कार होते हैं, उतना ही अडिग मनुष्य अपने कर्तव्य पर, अपने धर्म पर, सत्य पर और न्याय पर होता है। इस दुनियां में बिना स्वार्थ के प्यार सिर्फ माँ ही कर सकती है।










