अरे माटी के पुतले, न इतरा के चल
अरे माटी के पुतले
न इतरा के चल
तेरा जीवन का कोई भरोसा नहीं
बूँद पानी की पड़ते
पिघल जायेगा
कच्चे बर्तन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
माया ठगनी है नखरे दिखाती फिरे
मोह माया में सबको बिछाती फिरे
जाने कितने घरों को किया है भसम
ऐसा माया का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
न इतरा के चल
तेरा जीवन का कोई भरोसा नहीं
बूँद पानी की पड़ते
पिघल जायेगा
कच्चे बर्तन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
सारा सन्सार सागर है स्वार्थ भरा
इसके लालच में हरगिज दीवाना न बन
गैर तो गैर अपने भी देंगे दगा
दोष दुश्मन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
न इतरा के चल
तेरा जीवन का कोई भरोसा नहीं
बूँद पानी की पड़ते
पिघल जायेगा
कच्चे बर्तन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
मेरा मेरा न कर
कोई तेरा नहीं
चार दिन का ये जग का
बसेरा नहीं
जब पिंजड़े से पंछी
निकल जायेगा
बोलते तन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले
न इतरा के चल
तेरा जीवन का कोई भरोसा नहीं
बूँद पानी की पड़ते
पिघल जायेगा
कच्चे बर्तन का कोई भरोसा नहीं
अरे माटी के पुतले










