अन्तर्यामी नाथ तुम जीवन के आधार

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अन्तर्यामी नाथ तुम जीवन के आधार

अन्तर्यामी नाथ तुम
जीवन के आधार
जो तुम छोड़ो बाँह तो
कौन लगाये पार

श्वास श्वास में ओ३म् जप
वृथा श्वास मत खोय
ना जाने इस श्वास का
फिर आवन होय न होय

प्रभु नाम के अमृत रस का
जो प्राणी पान करेगा
उसकी बुद्धि को निर्मल
निश्चय भगवान् करेगा

जो सुबह शाम नित्य मन में
भगवान् का ध्यान लगाये
हृदय रूपी मन्दिर का
सब जमा मैल धुल जाये
जो बैठ के सुख आसन में
नित्य प्राणायाम करेगा
उसकी बुद्धि को निर्मल
निश्चय भगवान् करेगा
प्रभु नाम के अमृत रस का
जो प्राणी पान करेगा

विषयों से मन हट जाये
कर जाये व्यसन किनारा
प्रभु भक्ति में मन को लगा ले
यदि चाहे कुछ तू सहारा
सत्सङ्ग ज्ञान गङ्गा में
मल मल जो स्नान करेगा
उसकी बुद्धि को निर्मल
निश्चय भगवान् करेगा
प्रभु नाम के अमृत रस का
जो प्राणी पान करेगा

तेरे कर्मो का लेखा
जब देखेगा वो न्यायकारी
शुभ-अशुभ कर्म जो तेरे
आयेंगे सभी अगाडी
“राघव” वही पार हुआ है
जो ना अभिमान करेगा
उसकी बुद्धि को निर्मल
निश्चय भगवान् करेगा
प्रभु नाम के अमृत रस का
जो प्राणी पान करेगा