अन्धकार में है जीवन,हे ईश दया कर दो।

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अन्धकार में है जीवन,हे ईश दया कर दो।

तर्ज – होठों से छू लो तुम…….

अन्धकार में है जीवन,
हे ईश दया कर दो।
हृदय में हमारे भी,
उत्साह उमंग भर दो।
अन्धकार में है……

  1. संसार की उलझन में,
    ना उलझ कहीं जायें
    भक्ति से तेरी भगवन,
    मंज़िल अपनी पायें
    मुक्ति का यतन कर लें,
    भक्ति रूपी ज़र दो
    अन्धकार में है…..
  2. खुश्बू से तेरी महके,
    जीवन रूपी बगिया भूलें
    ना कभी तुझको,
    जीवन में हों खुशियाँ
    वाणीं से मधुर बोलें,
    ऐसा हमको स्वर दो
    अन्धकार में है………
  3. जीवन की राहों में,
    विचलित ना हो जायें
    वेदों की ओर बढ़े,
    वैदिक पथ अपनायें
    दर-दर ना कभी भटकें,
    हमको ऐसा वर दो
    अन्धकार में है……
  4. विनती करता है “सचिन”,
    उपकार का हो जीवन मद
    लोभ अहम् ना हो,
    उज्जवल हो सबका
    मन सत्कार अतिथि का,
    करने वाला दर दो
    अन्धकार में है………