अनमिट ही रही दिल में बसी तेरी ऋषि याद
तर्ज : रंजिश ही सही दिल को दुःखाने के लिए आज
अनमिट ही रही दिल में बसी तेरी ऋषि याद
कैसे भुला दें तेरा परोपकार ऋषिराज ॥ अनमिट ही…
ऋषिवर तेरी दया की अमिट छाप है मन में
जी चाहता है प्रेम दया में पले समाज ॥ अनमिट ही…
तूने दलित-समाज बनाया ललित-समाज
हम सब को मिटा देने हैं दामन में लग दाग ॥ अनमिट ही…
विधवा अनाथ गौओं का तूने बढ़ाया मान
जब हम हैं तेरे भक्त तो इन सबकी रखें लाज ॥ अनमिट ही…
पाखण्ड झूठ मिट गया वेदों के तर्क से
फैलेगा फिर से जब गिरेगी आर्यों की गाज़ ॥ अनमिट ही…
वेद के संदेशों से हुए संकृत हृदय के तार
देवे सुनाई फिर से वेदों का ब्रह्मनाद ॥ अनमिट ही…
डुबकी लगा निकाले वेद सिन्धु से रतन
धनवान ज्ञान के बने तेरी कृपा से आज ॥ अनमिट ही…
वैदिक धर्म प्रचार में छोड़ी नहीं कसर
वेदों की नाव में सवार होंगे भवसे पार ॥ अनमिट ही…
करुणा दया उदारता अनुराग और त्याग
उपकार सत्यधर्म का हमको पढ़ाया पाठ ॥ अनमिट ही…
खुद पीके घूँट जहर के हमको दिया अमृत
ऋषि ऋण को हम चुकाने के काबिल होते काश ॥ अनमिट ही…
ऐ धर्म के दीवाने दयानन्द है तू अमर
दीवानंगी पे तेरी जमाने को रहा नाज ॥ अनमिट ही…










