अमर पथ वेद का हमको, बताया था दयानन्द ने।

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अमर पथ वेद का हमको, बताया था दयानन्द ने।

अमर पथ वेद का हमको,
बताया था दयानन्द ने।
मधुर अमृत का फव्वारा,
चलाया था दयानन्द ने।।

थी डगमग देश की नय्या,
खिवैया था नही कोई।
दया करके किनारे पर,
लगाया था दयानन्द ने।।1।।
अमर पथ वेद का हमको……

दलित दुखियों, अनाथों,
बेजुबानों का रहा हामी।
अखिल आनन्द मुक्ति का,
बताया था दयानन्द ने। ।2।।
अमर पथ वेद का हमको……

सुना था ले गया वेदों को
शंखासुर धरातल को।
मगर पावन श्रुति दर्शन,
कराया था दयानन्द ने।।3।।
अमर पथ वेद का हमको……

खिला जब ज्ञान का सूरज,
तो आँखें ‘हंस’ ने खोली ।
पुनः सदियों से सोतों,
को जगाया दयानन्द ने।।4।।
अमर पथ वेद का हमको……