अल्पकालीन जीवन,ब्रह्म पूरा भरा है।

0
39

अल्पकालीन जीवन,ब्रह्म पूरा भरा है।

अल्पकालीन जीवन,
ब्रह्म पूरा भरा है।
हम ही ना पहचानें… (२)
हमारी ही मूल ।। टेक ।।

जीया ना परहित हरपल हमनें।
रहे मगन हम खुद में।।
स्वहित त्यागें जो भी जग में।
ब्रह्म जीएं वो खुद में ।। १ ।।

सुख दुःख पहिए सांस के घोड़े।
तन स्थ अद्भुत मिला है… (२)
कर्म स्नेहन स्वहित रास्ते।
आत्म तो अमर भया है।। २ ।।