अखिलाधार अमर सुख धाम
अखिलाधार अमर सुख धाम,
एक सहारा तेरा नाम ।
कैसी सुन्दर सृष्टि बनाई,
चन्द्र सूर्य-सी ज्योति जगाई।
कैसी अद्भुत वायु बहाई,
एक से एक विलक्षण काम।
एक सहारा तेरा नाम ।।१।।
सुन्दर सरस सुधा सम पानी,
अमृत अन्न खायें सब प्राणी।
गुण गावें ज्ञानी और ध्यानी,
भजें निरन्तर आठों याम।
एक सहारा तेरा नाम ।।२।।
पत्र-पत्र रंग रूप निराला,
पुष्प-पुष्प में गन्ध विशाला।
फल-फल पृथक् प्रेम रस प्याला,
लीला तेरी ललित ललाम।
एक सहारा तेरा नाम।।३।।
आप अगर सत् पथ के स्वामी,
मैं हूँ अमर असत् पथगामी।
एक नाम के दोनों नामी,
मैं गुणरहित आप गुण ग्राम।
एक सहारा तेरा नाम ।










