अकेले में हमने,कभी ना विचारा।
तर्ज – मुहब्बत की झूठी कहानी……
अकेले में हमने,
कभी ना विचारा।
ये अनमोल हीरा है,
जीवन हमारा।।
“सचिन” आज नग्में,
सभी को सुनाओ प्रभु का भजन भी,
जी-भर के गाओ ये जीवन प्रभु ने,
दिया सबसे न्यारा अकेले में हमने……
यूँ जीवन गंवाकर,
कुछ भी ना पाया ये अवसर सुनहरा,
यूँ ही गंवाया ना नैया मिली ना,
पाया किनारा अकेले में हमने……
ख़बर क्या है हमको,
ये कब तक हैं सासें जायेंगे चले इस,
रंगी जहाँ से जब तक जियेंगे,
प्रभु ही सहारा अकेले में हमने……
उजाला हो जीवन में,
चाहे अंधेरा मगर ज़िन्दगी है,
रैन बसेरा सदा ना रहेगा,
जीवन ये प्यारा अकेले में हमने……










