ऐ वतन के नौजवां,जा रहा है तू कहां

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ऐ वतन के नौजवां,जा रहा है तू कहां

ऐ वतन के नौजवां,
जा रहा है तू कहां,
याद कर वो दास्तां,
जिसको गाता है जहां ।।

थरथराती थी जमीं,
जब कदम रखता था तू,
काल भी हो सामने,
पर नहीं डरता था तू।
आज भी करते बयां,
ये जमीं और आसमां ।। याद कर…

रखी तूने लाज,
अपनी बहनों के सिन्दूर
की चाल भी चलने न पाई,
दुष्ट पापी क्रूर की।
उनकी वो खरमस्तियां,
मेट डाली हस्तियां ।। याद कर……

रहजनों हमलावरों का,
सर झुकाया था कभी
बाजुए कुव्वत ने तेरी,
नभ हिलाया था कभी
हाथ ले तीरों कमां जब
भी तू बढ़ता गया।। याद कर…

देख ले बेमोल तेरा,
आज कैसा ढंग है
रंग ए महफिल में भी,
तेरा रंग ये बदरंग है
पस्त हो गया हौसला,
शिवा और प्रताप का।। याद कर..