ऐ ऋषि याद आए जमाना तेरा।
ऐ ऋषि याद आए जमाना तेरा।
ऐ ऋषि काम वेदों का लाना तेरा।
कार्तिक का महीना था
अभी बहुत जीना था,
पिलाया था जहर पापी
धौमित्र कमीना था।
‘कर्मठ’ जहर पीकर भी
मुल्काना तेरा ऐ ऋषि
याद आए जमाना तेरा।
अंधियारी रात में
कोई ना था साथ में,
ऋषि था अकेला
और वेद थे हाथ में।
ऐसी मुश्किलों में
यहाँ आना तेरा-
ऐ ऋषि याद आए
जमाना तेरा।
हवा प्रतिकूल थी
नहीं अनुकूल थी,
समझा ना जग ने तुझको
बड़ी भारी भूल की।
न छोड़ा जालिमों ने
सताना तेरा-ऐ ऋषि
याद आए जमाना तेरा।
लगा जब सुधारने
काशी हरिद्वार में,
फेंक भी दिया था
तुझको गंगा की धार में।
काम था प्रभु का बचाना तेरा-
ऐ त्रऋषि याद आए जमाना तेरा।
चला छोड़ बस्ती को
तजा बुतपरस्ती को,
उदयपुर में ठुकराया था
लाखों की हस्ती को।
दिल था प्रभु का दिवाना तेरा-
ऐ ऋषि याद आए जमाना तेरा।










