ऐ नाथ दयालु हो

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ऐ नाथ दयालु हो

ऐ नाथ दयालु हो,
बस इतनी सी दया कर दो
आया हूं शरण तेरी,
भक्ति के भाव भर दो।।

तेरे रंग में रंग जाये,
ये चंचल मन मेरा
रहे साफ न धुंधला हो,
मन का दर्पण मेरा।
हर शै में तुझे देखें,
हे देव यही वर दो।।

हो कर के दूर तुझसे,
सदियों से मैं भटक रहा
नहीं पार मैं हो पाया,
इस भंवर में अटक रहा
हो जाऊं पार जग से,
शक्ति जगदीश्वर दो।।

मर कर कभी जीता हूं,
जीकर कभी मरता हूं
नौ मास गर्भ की जेल,
जाने से मैं डरता हूं।
बन्धन से छूट जाऊं,
कुछ और न धन-जर दो ।।

हो जाऊं अलग,
जग के शोक-सन्तापों
से कर्मठ दे मुझे बचा,
दुर्गम भय पापों से।
गाऊं मैं गीत तेरे,
मुझे इतना मधुर स्वर दो।।