ऐ मन मेरे, मेरे क्या है तेरी अब इच्छा
ऐ मन मेरे, मेरे,
क्या है तेरी अब इच्छा
पालन यम-नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे
मनसा, वाचा, कर्मणा और
व्रत अहिंसा का,
व्रत अहिंसा का
तेरे हर व्यवहार में हो
आचरण सच का,
आचरण सच का
ना तू धर चोरी का धन
ना तू धर चोरी का धन
ना धन ले चोरी का
पालन यम नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे
आन्तरिक और बाह्य जीवन
हो ब्रह्मचर्य का,
हो ब्रह्मचर्य का
काम, क्रोध, ना लोभ, मोह
ना हो पापों का,
ना हो पापों का
कर ले तू पावन कर्म
कर ले तू पावन कर्म
पावन कर्म तू सदा
पालन यम-नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे
ईश-परायण हो मेरे मन
रह सन्तुष्ट सदा
रह सन्तुष्ट सदा
पवि जीवन का कर संकल्प
स्वार्थ मन में ना ला,
स्वार्थ मन में ना ला
कर ले चिन्तन और मनन
कर ले चिन्तन और मनन
चिन्तन मनन अपना
पालन यम नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे
ना समझ तू भेद अपने
और पराए का
और पराए का
पृथ्वी तेरी, तू है उसका
और आकाश तेरा
और आकाश तेरा
जीव-जात को कर पसन्द
मन हो प्रेम भरा
पालन यम नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे, मेरे,
क्या है तेरी अब इच्छा
पालन यम-नियमों का कर ले
मन ना किसी का दु:खा
ऐ मन मेरे
ओ३म् अ꣡ध्व꣢र्यो꣣ अ꣡द्रि꣢भिः सु꣣त꣡ꣳ सोमं꣢꣯ प꣣वि꣢त्र꣣ आ꣡ न꣢य ।
पु꣣नाही꣡न्द्रा꣢य꣣ पा꣡त꣢वे ॥४९९॥
सामवेद 499,
ओ३म् अ꣡ध्व꣢र्यो꣣ अ꣡द्रि꣢भिः सु꣣त꣡ꣳ सोमं꣢꣯ प꣣वि꣢त्र꣣ आ꣡ न꣢य ।
पु꣣नाही꣡न्द्रा꣢य꣣ पा꣡त꣢वे ॥१२२५॥
सामवेद 1225
ओ३म् अध्व॑र्यो॒ अद्रि॑भिः सु॒तं सोमं॑ प॒वित्र॒ आ सृ॑ज ।
पु॒नी॒हीन्द्रा॑य॒ पात॑वे ॥
ऋग्वेद 9/51/1
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई










