इन्साफ़ है जो भगवान् करे
(तर्ज – छू लेने दो नाजुक……)
अच्छा ही सभी कुछ होता है,
इन्साफ़ है जो भगवान् करे।
फिर उसका किया कब टलता है,
जो लाख यतन इनसान करे।
अच्छा ही सभी कुछ होता है……
१. है परम कृपा उस ईश्वर,
की तुझे जन्म मिला है।
मानव का कोई और भी है,
इस दुनियाँ में जो इतना,
बड़ा एहसान करे।
अच्छा ही सभी कुछ होता है…………
२. ख़ुशियों में वक्त गुज़रता हो,
या सर पे मुसीबत की घड़ियाँ,
यह फल है किये हुए कर्मों का,
शिकवा तू क्यों नादान करे।
अच्छा ही सभी कुछ होता है…….
३. सच हैं ये बुजुर्गों की बातें,
जो करता है वो भरता है।
अरे उसका भला फिर क्या होगा,
औरों का ही जो नुकसान करे।
अच्छा ही सभी कुछ होता है…….
४. दो फूल चढ़ा कर मंदिर में,
सुख चैन ख़ज़ाना माँग लिया।
इस से तो ‘पथिक’ वह बेहतर है,
जो एक न कौड़ी दान करे।
अच्छा ही सभी कुछ होता है………..










