आए अनगिन सुधारक जगाने यहां

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आए अनगिन सुधारक जगाने यहां

आए अनगिन सुधारक जगाने यहां,
पर दयानन्द सा कोई आया नहीं।
भाष्य वेदों का यौगिक सरल श्रेष्ठतम,
ऐसा अब तक किसी ने बनाया नहीं।।

बेद का नाम लेकर गऊ, अश्व, नर,
यज्ञ में काट करके जलाए गए है
ये दूषित कर्म उस ऋषि के बिना,
हमको आकर किसी ने बताया नहीं।।

कोई कहता था मानव के हित के लिए,
वेद में मांस खाने का संकेत है मांष का
अर्थ होता उड़द आर्यो! भाष्यकर्ता
इसे जान पाया नहीं. ।।

वेद विपरीत पंथों मतों मजहबों,
आदि की पोल कोई सुनाता था
उस ऋषि की तरह ढोंगियों को कभी,
कर निरुत्तर किसी ने हराया नहीं।।

कस के देखो कसौटी पे जब-जब उसे,
पूर्णरूपेण नरदेव असली मिला हर
परीक्षा में उत्तीर्ण पाया सदा,
सत्य पथ से कभी पग हटाया नहीं।।