भक्ति
आया हूँ तेरे दर पे, भक्तिभाव को लिये
दस्तक मैं दे रहा हूँ, प्रभु द्वार खोलिए।।
जीवन में कितने कर्म, भले और बुरे हुए
अंजाने में कुछ, और जान-बूझ के किये है
आपकी खुशी, प्रभु कैसे भी तोलिए।।1।।
दस्तक मैं दे रहा हूँ प्रभु……….
होठों पर ओ३म् नाम है वो मन भी रहे
चातक के जैसी प्यास वही हूबहू रहे
धागा है जीवन ओ३म् के मोती पिरोलिये।।2।।
दस्तक मैं दे रहा हूँ प्रभु………
जागा हूँ मैं जीवन में चाहे देर से भले
आशा के दीप कुछ तो मेरे मन में भी जले
अज्ञान वश जीवन में बहुत देर सो लिये। ।3।।
दस्तक मैं दे रहा हूँ प्रभु………
सुविचार










