आया है जहाँ में शुभ कर्म कमाये जा
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाये जा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
प्रातः-सायं ओ३म् को गा ले
परम पिता से प्रीति लगा ले
जीवन में उपकार किया कर
मत न पाप कमा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाये जा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
सहस्त्र करों से दान किया कर
अमृत बाँट तू अमृत पिया कर
जीवन में जी-वन बन जाये
ऐसी ज्योत जागा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाये जा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
मनन-शील ही मनुष्य कहावे
ऐसा लेख वेद बतलावे
मनुर्भव उच्चारण करके
वेद रहा समझा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाये जा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
अमृतमयी वेद की वाणी
“राघव” पढ़ कर देख ले प्राणी
परम धर्म वेदों का पढ़ना
मिथ्या नहीं जरा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाये जा
देख निराली दुनिया मत
ना जीवन व्यर्थ गँवा










