आत्म कृषक है सबल

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आत्म कृषक है सबल

आत्म कृषक है सबल,
यम-नियमों का है हल।
इन्द्रियां वृषभ हैं सुशक्त,
मन है भूमि उजल ।। १ ।।

प्राण-अपान है ओष समीर,
ब्रह्म गुण हैं सुबादल।
सद्गुण हरित सस्य श्यामल,
आनन्द लहलहाती फसल ।। २ ।।