आत्म ज्ञान का दाता और शरीर आत्मा का

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आत्म ज्ञान का दाता और शरीर आत्मा का

आत्म ज्ञान का दाता
और शरीर आत्मा का
तू ही है स्वामी
सब विद्वान् तेरी उपासना करते हैं

प्रत्यक्ष सत्य स्वरूप है जिसका
शासन न्याय तेरी सच्ची है शिक्षा
जिसका आश्रय ही मोक्ष
सत्ता तेरी परोक्ष
आनन्द दाता
योगी जन तेरी उपासना करते हैं

भक्ति ना कर नहीं, यह है मृत्यु
आज्ञा न मानना दु:ख का हेतु
सकल ज्ञान के दाता
सुख स्वरूप मन भाता
हे परमात्मा !!
पाये तुझको ये कामना करते हैं

संसार का स्वामी है परमात्मा
और देह का स्वामी है आत्मा
अन्तःकरण शुद्ध रहे
आज्ञा में हर पल रहे
वेदों का ज्ञाता
सर्वाधार तेरी वन्दना करते हैं

कण कण में रमा जग का स्वामी
पाया उसी ने खुदी जिसने मिटा दी
एक रस है सदा
करता सब पर दया
सबका विधाता
हम तो तेरा ही ध्यान करते हैं

सारे विश्व को बल देने वाला
जलचर नभचर सभी को तूने ही पाला
सर्वव्यापक तुम्हीं
दु:ख विनाशक तुम्हीं
मेरे दाता
कहे “मिथलेश” तुमको हम याद करते हैं

आत्म ज्ञान का दाता
और शरीर आत्मा का
तू ही है स्वामी
सब विद्वान् तेरी उपासना करते हैं