आप चाहते हो लाना देश के अन्दर खुशहाली।

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आप चाहते हो लाना देश के अन्दर खुशहाली।

आप चाहते हो लाना
देश के अन्दर खुशहाली।
सबसे पहला काम है
बदलो दूषित शिक्षा प्रणाली ।।

यह शिक्षा उद्देश्यहीन है
इससे दीनता बढ़ती जा ।
ज्यो-ज्यों शिक्षा बढ़ती जा
त्यो-त्यों मलीनता बढ़तीजा ।।

इस दूषित शिक्षा के कारण
चरित्र हीनता बढ़ती जा।
नैतिक मानसिक शारीरिक और
आत्मिकक्षीणता बढ़ती जा।
यह हमारी शिक्षा नहीं
स्कीम है मैकाले वाली ।।1।।

शिक्षा वह है जिससे विद्या
और सभ्यता आती है।।
जितेन्द्रिय धर्मात्मा भी
तो समर्थ शिक्षा ही बनाती है।।

शिक्षा वह है जो अविद्यादि
दोषों को मिटाती है।
पृथ्वी से परमेश्वर तक का
यथार्थ ज्ञान कराती है।।
इसलिए प्रकाश दर्पण सोपान से
उपमा दे डाली।।2।।

शिक्षा का प्रथम प्रयोजन या,
स्वरूप अवतु में नीहित।
अव धातु रक्षण दीप्ती
आदि उन्नीस अर्थो से दीपित।

विद्या का प्रथम प्रयोज है
विद्यार्थी हो राक्षित शिक्षा से
शिक्षित का मन और शरीर
आत्मा हो विकसित ।।
शिक्षित स्वावलम्बी हो
जिससे शिक्षा वही महत्वशाली ।।३।।

सुशिक्षितों की दुनिया में
कभी भ्रष्टाचार नहीं होगा।
ऊंच नींच और घृणा द्वेष का
दुर्व्यवहार नहीं होगा।।

मन में वचन में और कर्म में
कोई विकार नहीं होगा।
सच पूछो तो दुखी स्वप्न मे
भी संसार नहीं होगा।।
सुशिक्षा से शोभाराम दुम दबाके
भागे कंगाली ।।4।।