आप अपने को पहचानिये
आप अपने आपको पहचानिये ।
कौन हूँ? आया कहाँ से जानिये ॥
क्यों भटकता फिर रहा दर बदर,
देखले अपने ही अन्दर झांक कर,
सीख उत्तम है इसी को मानिये ।
मर नहीं सकता कभी तू है अमर,
आ नहीं सकता बुढ़ापा है अजर,
मरने को मन में कभी न ठानिये ।
आग भी तुझको जला सकती नहीं,
पानी की बूंदे गला सकती नहीं,
वेद का उपदेश करना ध्यान से।
तू नहीं संसार तुझ से है जहाँ,
कर रहे बेमोल उपनिषद बयाँ,
वेद ने उत्तम दिया है ज्ञानिये ।
खेने दो आज, नाव कल,
कर पतवार गहे न गहे,
जीवन सरिता में फिर शायद,
ऐसी धार बहे न बहे।
अंतिम सांस निकलने तक है,
बिस्मिल की अभिलाष यही,
तेरा वैभव अमर रहे माँ,
हम दिन चार रहें न रहें ॥










