आओ प्यारे भाइयो सुन लो मेरी एक दास्तान

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आओ प्यारे भाइयो सुन लो मेरी एक दास्तान

आओ प्यारे भाइयो सुन
लो मेरी एक दास्तान,
मेल फूट लोभ से क्या
लाभ क्या नुकसान,
तुम्हें हम आज बताते हैं ।। टेक ।।

कबूतरों का झुण्ड एक,
भूखा दाने की खोज में।
फिर रहा था अब मिला,
दाना उन्हें कई रोज में,
मौज में आकर कबूतर,
कर खाने का ध्यान,
लोभ में अन्धे होकर
फंस गये जाल दरम्यान,
पीटकर सर पछताते हैं।।1।।

ललकार कर कहने लगा
सरदार कर लो प्यार,
शोर करना छोड़ो
जोर लगाओ इकसार,
इजहार सुन सरदार
के सबने लगाई तान,
फाड़ करके ले उड़े
उस जाल को आसमान,
खुशी में चहचहाते हैं।।2।।

कबूतरों में बड़ गई
अब फूट दौड़ कर,
आपस में लडने लगे
प्रीति को तोड़ कर,
छोड़कर के प्यार सब
में छा गया अभिमान,
सबने ढिल्ली छोड़
दी दे मौत का एलान,
सभी नीचे गिर जाते हैं। ।3।।

झट शिकारी आ गया
जहां पर कबूतर थे पड़े,
टोकरी में भर लिये
जितने भी थे छोटे बड़े,
रो पड़े थे सब कबूतर
वक्त आखिरी जान,
अपनी नादानी से प्रेमी
शोभाराम नादान फूट
में प्राण गंवाते हैं।।4।।