आओ हम अग्नि राजा की

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आओ हम अग्नि राजा की

आओ हम अग्नि राजा की
तेजोमय शरण में जाएँ
राजा की है निराली शान
प्रजा के काम जो आए
आओ हम अग्नि राजा की

वह अन्तः प्रेरणा-शान्ति
ज्ञानामृत का भी दाता है
है आत्मा रूपी सोमरक्षक
समस्वरता-सौम्यता लाए
आओ हम अग्नि राजा की

वह अग्नि देवता है ‘वसु’
उजड़तों को बसाता है
साहस मनोबल व आत्मबल
का दाता भी वह कहलाए
आओ हम अग्नि राजा की

वह चलता आगे उषा के
चमकती प्रभु के वो कारण
आकाशीय जल विद्युत चमके
वह रवि, शशि, तारे चमकाए
आओ हम अग्नि राजा की

आओ इनके ही जैसे हम
प्रभु से चमक ले आएँ
चमकते अग्नि राजा सम
चमाचम चमक पा जाएँ
आओ हम अग्नि राजा की
तेजोमय शरण में जाएँ
राजा की है निराली शान
प्रजा के काम जो आए
आओ हम अग्नि राजा की