आओ! हम सब यह जाने
आओ! हम सब यह जाने
परिपूर्ण है सन्सार
कोई त्रुटि ना कमी है
क्योंकि प्रभु है आधार
परिपूर्णता है उसकी
कर सकें ना अनुभव
क्या समझ सकेंगे ?
पूर्ण पुरुष का प्यार
आओ! हम सब यह जाने
परिपूर्ण है सन्सार
कोई त्रुटि ना कमी है
क्योंकि प्रभु है आधार
परिपूर्णता है उसकी
कर सकें ना अनुभव
क्या समझ सकेंगे ?
पूर्ण पुरुष का प्यार
दृष्टि चाहे हमारी
होती भिन्न-भिन्न
पर समूची सृष्टि
दिख रही अविच्छिन्न
जब पूर्ण पुरुष ने
रचा है जगत्
फिर तो कैसे ना होगा?
कहो परिपूर्ण
रख दिया ना केवल
रचना करके जगत्
उसे सींच रहा है
प्रभु सर्वाधार
आओ! हम सब यह जाने
परिपूर्ण है सन्सार
कोई त्रुटि ना कमी है
क्योंकि प्रभु है आधार
परिपूर्णता है उसकी
कर सकें ना अनुभव
क्या समझ सकेंगे ?
पूर्ण पुरुष का प्यार
हमने जान लिया है
प्रभु है निपुण
जग-जवन को हमारे
लिए लिया चुन
आओ पहचाने
परिपूर्ण पालक को हम
उसके पथ का पथिक बन
हो सार्थक जनम
उसकी फुलवारी के
बनते जाएँ सुमन
उस की कृतियाँ कृपामय
बनी हैं उदार
आओ! हम सब यह जाने
परिपूर्ण है सन्सार
कोई त्रुटि ना कमी है
क्योंकि प्रभु है आधार
परिपूर्णता है उसकी
कर सकें ना अनुभव
क्या समझ सकेंगे ?
पूर्ण पुरुष का प्यार
आओ! हम सब यह जाने
परिपूर्ण है सन्सार
परिपूर्ण है सन्सार
परिपूर्ण है सन्सार










