आना किसी का है जाना किसी का
आना किसी का है जाना किसी का,
सदा ना रहा यहां ठिकाना किसी का।
प्रातः बचपन दोपहर जवानी,
शाम है बुढ़ापा खत्म कहानी।
इससे बड़ा ना फसाना किसी का ।।1।।
आना ना जाना जाना ना जाना,
जाने व आने का मार्ग ना जाना,
एक ही है सबका जुदा ना किसी का।।2 ||
रोकर जियो या जियो हँस हँस कर,
अन्त में मौत के पन्जों में फँस कर,
चलता नहीं है बहाना किसी का।।3।।
दुनियां के ‘प्रेमी’ ए दुनिया वालो,
मानव के चौले को सफल बनालो,
कभी दिल से चाहो बुरा ना किसी का।।4।।










