आज पूर्ति करनी है

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आज पूर्ति करनी है

आज पूर्ति करनी है
भारत मां के अरमानों की।
आलस्य और प्रमाद छोड़कर
बाजी लगा दों प्राणों की । टेक।

एक मिनट बेकार न जावे
समय का सद्धपयोग करो।
छोटे बड़े सैकड़ों चालू अब
धन्धें उद्योग करो।।

रोगी होना पाप, बनाओं
स्वास्थ्य खत्म सब रोग करो।
परिश्रम से जो द्रव्य मिले,
सन्तोष से उसका भोग करो।।
जिम्मेदारी आज यह सारी
भारतीय नौजवानों की ।।1।।

धीरज धर्म मित्र और नारी
विप्ता में पहचाने जा।
कौन हैं अपने कौन बेगाने
वक्त पड़े पै जाने जां।।
जो विप्ता में साथ निभायें
सदा वह अपने माने जां।
धूर्त स्वार्थी साथी समय पर
करके भाग बहाने जां ।।
दाना दुश्मन अच्छा अपेक्षा
कहा दोस्त नादानों की।।2।।

मौत लड़ाई कभी भी भाई
ना रोके से रूका करै।
प्रबल शक्ति के आगे सदा
निर्बल शक्ति झुका करै।।
आंधी और तूफान आग में
निर्बल का घर फुंका करै।
चांद के ऊपर थूकने वाले
के मुंह पर ही थुका करै।।
हाथी नहीं चींटी मरती हैं
ठोकर से इन्सानों की।।3।।

आज विश्व की दौड़ के
अन्दर जो भी पीछे रह जायेंगे।
तेज समय के प्रवाह में वह
तिनके की तरह बह जाायेंगे।
जो आराम हराम समझ कर
कर्मक्षेत्र में फह जायेंगे।
शोभाराम वह धीर वीर
एक रोज हर्ष से कह जायेंगे।
यह लो कुन्जी दुनियां वालों,
नये-नये निर्माणों की।।4।।