आज मिल सब गीत गाओ

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आज मिल सब गीत गाओ

आज मिल सब गीत गाओ,
उस प्रभु को धन्यवाद।
जिसका यश नित गाते हैं,
गन्धर्व ऋषि-मुनि धन्यवाद ।।

मन्दिरों में कन्दरों में,
पर्वतों के शिखर पर।
देते हैं लगातार सौ-सौ
बार मुनिजन धन्यवाद ।।

कूप में, तालाब में,
सिन्धु की गहरी धार में।
प्रेम रस में तृप्त हो करते हैं
जलचर धन्यवाद ।।
करते हैं जंगल में मंगल
पक्षीगण हर शाख पर।
पाते हैं आनन्द मिल गाते हैं
स्वर भर धन्यवाद ।।

गानकर ‘अमीचन्द’
भजनान्नन्द ईश्वर स्तुति।
ध्यान धर सुनते हैं
श्रोता कान घर-धर धन्यवाद ।।