आज का इन्सान क्या इन्सान है
आज का इन्सान
क्या इन्सान है,
चोला मानव का
मगर शैतान है।
ज्ञान की चर्चा न
कर इस मंच पर,
तू अभी ‘बेमोल’ खुद
नादान है…..।
बगुले जैसा भेष
भक्ति राम की,
तन के उजले मन
कपट की खान है….।
पाप करने से
कोई कैसे डरे,
मन्दिरों में कैद
जब भगवान् है….।
अपने से कमजोर
का पीता लहू,
बेरहम बेप्रीत दिल
पाषाण है…..।
कहते हैं परमात्मा
कुछ भी नहीं,
कैसा सुन्दर आज
का विज्ञान है…।
लूटकर दौलत
जो रखता जोड़कर,
यह सभी कुछ मौत
का सामान है….।










