आज देश की नाव डोल रही मझधार
आज देश की नाव डोल रही मझधार में आर्यों
बनके खिवैया देश की नैया कर दो पार आर्यों
श्रवण राम से पुत्र बनाओ, लखन भरत से भ्राता
सीता जैसी नारी हों कौशल्या सुमित्रा माता
ऐसा ही तो परिवार जग में आदर्श कहाता
मर्यादित परिवार के घर पर ईश्वर सुख बरसाता
निश दिन दुखों में फंसता जा रहा है
संसार आर्यो।।1।। बनके खिवैया…
ऊंचनीच और छुआछूत का
भयंकर भूत भगा दो
भूले-भटके भाइयों को
सीधा मार्ग दिखला दो
प्रान्तवाद और जातिवाद
अब भाषावाद मिटा दो
हम सब पथिक एक ही पथ के
सबको यह समझा दो
आज पतन के घोड़े पर है
विश्व सवार आर्यो।।2।। बन के खिवैया…
लक्ष्य पूर्ति की इच्छा में,
उलटे पथ पर दौड़ रहे
नई सभ्यता के चक्कर में
मनुष्य मनुष्यता छोड़ रहे
मरने और मारने के लिए
अस्त्रों की ला होड़ रहे
भौतिकवाद के चक्कर में हुए,
चकनाचूर सिर फोड़ रहे
विश्व के मिटने के बनते जा रहे
आसार आर्यो ।।3।। बनके खिवैया…
उलझन में पड़ करके विश्व को
आता सुख का स्वास नहीं
अब तक तो बच रहे थे
लेकिन अब बचने की आस नहीं
फैल रहे जो रोग भयंकर
होता इनका नाश नहीं
इन रोगों की सिवाय तम्हारे
दवा किसी के पास नहीं
विश्व शान्ति का प्रेमी है,
तुम पर भार आर्यो बनके
खिवैया देश की नैया
कर दो पार आर्यो।।4।। बनके खिवैया…










