वेद की आज्ञा जो जन पालें, ना वह कष्ट उठाते हैं।

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वेद की आज्ञा जो जन पालें, ना वह कष्ट उठाते हैं।

वेद की आज्ञा जो जन पालें,
ना वह कष्ट उठाते हैं।
दर्शन के अनुसार चलें,
वह सुख सदा ही पाते हैं।
जिनका हो आचार श्रेष्ठ,
वह सज्जन मनुष्य कहाते हैं।
सबके हों अनुकूल काम,
जो”धर्मी”धर्म बताते हैं।

जिनके पास में विद्या होती,
ब्राह्मण बड़ा कहाता है।
बल पौरुष के द्वारा क्षत्रिय,
मान जगत में पता है।
वैश्य बड़ा हो वही कहलाता,
धन जो अधिक कमाता है।
आयु से हो शुद्ध बड़ा,
न्यू”धर्मी”सत्य बताता है।

ब्रह्मचारी स्नान करे नित,
परमपिता का ध्यान करे।
ब्रह्म सूत्र को धारण करले,
गुरु जनों का मान करे।
नित्य नियम से यज्ञ करे,
ना कभी किसी की हानि करे।
“धर्मी”ऐसा ब्रह्मचारी ही,
जीवन का उत्थान करे।

जिस जन में हो क्रोध अधिक,
ना बुद्धि उसमें पाती है।
जिसके चित्त में चिंता बसती,
आयु कम हो जाती है।
जो जन रहता प्रफुल्लित,
मन चिंता नहीं सताती है।
जो जन करता नेकी निशदिन,
बदी निकट नहीं आती है।