जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक, मांगे यह वरदान प्रभु।

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जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक, मांगे यह वरदान प्रभु।

जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक,
मांगे यह वरदान प्रभु।
द्वेष मिटाएं प्रेम बढ़ाये,
नेक बने इन्सान प्रभु ।।
भेद भाव सब मिटे हमारा,
सब को दिल से प्यार करें।

जाए नजर जिस और हमारी,
तेरा ही दीदार करें।
पल पल, छिन छिन करें हमेशा,
तेरा ही गुणगान प्रभु।
जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक…….

दुःख में कभी दुःखी न होवें,
सुख में सुख की चाह न हो।
जीवन के इस कठिन सफर में,
कांटों की परवाह न हो।
रोक सकें न पांव हमारे,
विघ्नों के तूफान प्रभु।।
जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक……

दीन दुखी और रोगी सबके,
दुखड़े निशदिन दूर करें।
पॉछ के आंसू रोते नैना,
हंसने पर मजबूर करें।।
तेरे चरणों की सेवा करते,
निकले तन से प्राण प्रभु ।।
जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक…….

तेरे ज्ञान से इस दुनिया का,
दूर अन्धेरा कर दें हम,
सत्य प्रेम के मीठे रस से,
सबका जीवन भर दें हम।।
वीर धीर बन जाना सीखें,
यह तेरी सन्तान प्रभु ।।
जोड़ के हाथ, झुका के मस्तक……..