सुनने वाला दूर नहीं है, दूर सुनाने वाला है।

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सुनने वाला दूर नहीं है, दूर सुनाने वाला है।

सुनने वाला दूर नहीं है,
दूर सुनाने वाला है।
पाल रहा जो दूर नहीं है,
दूर बुलाने वाला है।।

सर्वव्यापी, अन्तर्यामी,
दर्शन उसका दूर नहीं।
वह तो हरदम पास,
दूर ही दर्शन पाने वाला है।।

सुनने वाला दूर नहीं है,
दूर पर उपकारी सर्व स्नेही,
करता है उपकार सदा।
भूल रहा है आप जीव,
जो लाभ उठाने वाला है।।

सुनने वाला दूर नहीं है,
दूर अमर सखा है जीवन साथी,
कहते बंधु मात-पिता ।
सर्व सुखों की वर्षा करके,
कष्ट मिटाने वाला है।।
सुनने वाला दूर नहीं है, दूर…….

डाल जरा दृष्टि रचना पर,
शक्ति देख नियन्ता की।
अरे देख नियमों के अन्दर,
कौन चलाने वाला है।।
सुनने वाला दूर नहीं है, दूर……

न देवानामति व्रतं शतात्मा चन जीवति । ऋ.
देवों के नियम तोड़ कर कोई सौ वर्ष नहीं जी सकता।