आर्य समाज हमारे ऋषि की
आर्य समाज हमारे ऋषि की,
सबसे अमिट निशानी है।
अग्रगण्य बनकर समाज का,
जिसने की कुर्बानी है।
पूज्य दयानन्द स्वामी ने,
है इसका निर्माण किया।
दस नियमों में बांध सभी को,
इसको जीवनदान दिया।
आदि मूल सबका है ईश्वर,
सत् चित् आनन्द रूप अपार।
अजर अमर और अविनाशी विभु,
निराकार है सर्वाधार।
पढ़ो, पढ़ाओ नित वेदों को
सुनते रहो जुबानी है।
आर्य समाज हमारे ऋषि की सबसे…..
भुला चुके थे हम वेदों को,
आर्य ग्रंथ लुप्त हुए।
ढोंगी अन्धविश्वासी ग्रंथ ही,
इसकी जगह प्रयुक्त हुए।
सब धर्मों के अलग ग्रंथ थे,
सब आपस में लड़ते थे।
एक दूसरे की निन्दा कर,
नित स्वपक्ष पर अड़ते थे।
बिगड़ चुकी थी सबकी हालत,
जिसकी विषम कहानी है।।
आर्य समाज हमारे ऋषि की सबसे…..
यह वह शक्ति पूज्य है,
जिसके भय से बैरी डरते हैं।
देश-धर्म के परवाने,
निज आन-बान पर मरते हैं।
मिशन अधूरा है स्वामी का,
उसे अभी पूरा करना है।
अभी दूर है मंजिल अपनी,
आज विश्व के हर कोने में
ओ३म् ध्वजा फहरानी है।।
आर्य समाज हमारे ऋषि की सबसे…….










