इस नर तन चोले को पाकर, जीवन बर्बाद न कर

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शिक्षा

इस नर तन चोले को पाकर
जीवन बर्बाद न कर,
प्रभु से डर, प्रभु से डर

मनरूपी मंदिर के अंदर दुर्गुण
आबाद न कर,
प्रभु से डर, प्रभु से डर

परमपिता से प्यार कर,
शुद्ध आचार विचार कर।
इन्द्रियों को वश में करके,
मन अपने को मारकर।
जप ओम् नाम तू सुबह-शाम,
इसमें प्रमाद न करे।।
प्रभु से डर, प्रभु से डर

जैसा कर्म कमायेगा,
वैसा ही फल पायेगा
खिला जो फूल जवानी का,
है इक दिन वो मुरझायेगा।
तू दुष्टजनों से दूर ही रह,
उनकी इमदाद न कर।।
प्रभु से डर, प्रभु से डर

बिल्डिंग आलीशान बना,
फर्नीचर से खूब सजा।
बिजली के पंखे फिट करके
रेडियो बढ़िया-सा मंगवा।
पर अपने सुख के लिये
किसी का घर बर्बाद न कर।।
प्रभु से डर, प्रभु से डर

यदि है नौकर सरकारी,
भूमिपति या व्यापारी।
मास्टर, डॉक्टर, वैरिस्टर है
या नेता खद्दरधारी।
दुनियां में आ करके बन्दे
कोई अपराध न कर।।
प्रभु से डर, प्रभु से डर

सेवा अपना लक्ष्य बना,
दीन-दुःखी के कष्ट मिटा।
हीरा जन्म अमोलक है यह,
मिट्टी में न इसे मिला।
मन को संभाल तू ‘नंदलाल’,
इसको आजाद न कर।।
प्रभु से डर, प्रभु से डर

इस नर चोले को पाकर,
जीवन बर्बाद न कर -2
मनरूपी मंदिर के अंदर
दुर्गुण आबाद न कर,
प्रभु से डर, प्रभु से डर

सुविचार

जिस प्रकार ईश्वर ने सूर्य, पानी, पृथ्वी, अग्नि, वायु, आकाश, चन्द्रमा सभी को प्रदान किये हैं; इसी प्रकार वेदों का पवित्र ज्ञान भी समस्त मानव जाति के लिए है।