जागो रे, ऐ दौलत के दीवानों, जागो रे, ऐ दौलत के दीवानों।।

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शिक्षा

जागो रे, ऐ दौलत के दीवानों।
जागो रे, ऐ दौलत के दीवानों।।

दौलत लड़का दे सकती,
पर पुत्र दिलाना मुश्किल है।
दौलत नौकर दे सकती,
पर सेवक पाना मुश्किल है।।

दौलत औरत दे सकती,
पर पत्नि नहीं दिला सकती।
दौलत बिस्तर दे सकती,
पर नींद कभी नहीं ला सकती ।।

ऐनक मिलती दौलत से,
पर नैन कहाँ से लाओगे।
रोटी मिलती दौलत से,
पर भूख कहाँ से पाओगे।।

दौलत से बादाम मिलेंगे,
पर ताकत ना आएगी।
सुख दिलाएगी ये दौलत,
पर शांति नहीं दिलाएगी।।

कुछ पैसे में जाकर सज्जनों,
जहर अभी ले आओगे।
बीस करोड़ में भी अमृत की,
बूँद एक ना पाआगो।।

दौलत गीता दे सकती,
पर ज्ञान नहीं दे सकती है।
दौलत मंदिर दे सकती,
भगवान नहीं दे सकती है।।

धन से सुर्खी पाउडर ले लो,
सुन्दरता ना पाओगे।
बाजा ले लो दौलत से पर,
कंठ कहाँ से लाओगे।।

लाख सितारे चमकें रवि बिन,
दूर अंधेरा ना होगा।
आत्म ज्ञान के बिना सुखों का,
कभी सवेरा ना होगा।।