आस्था
प्रभु सारी दुनियाँ से, ऊँची तेरी शान है।
कितना महान् है तू, कितना महान है।।
यहाँ वहाँ कोने कोने, तू ही मशहूर है।
निकट से निकट और, दूर से भी दूर है।
तुझमें समाया हुआ, सकल जहान है।।
प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तू ही …….
एक मालिक है, सारी कायनात का।
फूलों भरी क्यारियों का, तारों की जमात का।
तेरी ही जमीन है ये, तेरा आसमान है।।
प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची ……
सबने जो रंग देखे, सभी तेरे रंग हैं।
जग में अनेक तेरे, पालन के ढंग हैं।
तुझको तो छोटे बड़े, सबका ही ध्यान है।।
प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची ……..
जितने भी दुनियाँ में, जीव देहधारी है।
सभी तेरे प्यार के, समान अधिकारी हैं।
‘पथिक’ सभी को तूने, दिया वरदान है।।
प्रभु सारी दुनियाँ से, ऊँची तेरी शान है।
कितना महान् है तू, कितना महान है।।










