ओ३म् ही रक्षक हमारे

0
6
ओ३म् ही रक्षक हमारे

ओ३म् ही रक्षक हमारे

ओ३म् ही रक्षक हमारे सब गुणों की खान हो।
अजर अमर अभय अव्यय विश्व विद्वान हो ।।

भूः सब प्राणियों के प्राण के भी प्राण हो।
आप हे जगदीश सब संसार के कल्याण हो ।।

भुवः सब दुख दूर करते आप कृपा निधान हो।
स्वः सदा सुखरूप मुखमय
सुखद सुखधि महान हो ।।

तत् वही सुप्रसिद्ध ब्रह्मन वेद वर्णित सार हो।
देव सवितुः सर्व उत्पादक व पालनहार हो।।

शुभ वरेण्यं वरण करने योग्य भगवन् आप हो।
शुद्ध भर्गः मल रहित भजनीय हो निष्पाप हो।।

दिव्य गुण देवस्य दिव्य स्वरूप देव अनूप के ।
धीमहि धारें हृदय में दिव्य गुण रूप के ।।

धियो यो नः वह हमारी बुद्धियों का हित करें।
ईश प्रचोदयात् नित सन्मार्ग में प्रेरित करें।।

बुद्धि का शुभ दान दे अपनी शरण में लीजिए ।
वेद पथ का कर पथिक
हमको अमर पद दीजिए ।।