महर्षि दयानन्द सरस्वती का ऐतिहासिक काशी शास्त्रार्थ
काशी शास्त्रार्थ की विजय-पताका से गूँज उठीं दिशाएँ
“सत्य कभी पराजित नहीं होता।”
महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा काशी में सम्पन्न ऐतिहासिक शास्त्रार्थ ने समस्त देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सत्य और वैदिक सिद्धान्तों की इस महान विजय की चर्चा तत्कालीन प्रमुख समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित हुई।
समाचार-पत्रों की प्रतिक्रियाएँ
◆ ‘प्रर्तमकमरनंदिनी’ (मासिक पत्रिका)
नाम की अपनी मासिक पत्रिका में पंडित सत्यव्रत सामाश्रामी जी ने स्वामी जी की सफलता की घोषणा कर दी।
◆ ‘रुहेलखण्ड’
नामक पत्र ने लिखा स्वामी दयानंद जी ने काशी के पंडितों को जीत लिया।
◆ ‘ज्ञान प्रदायिनी’ (लाहौर)
लाहौर ने समाचार दिया कि इसमें संदेह नहीं कि पंडित लोग मूर्ति पूजा की आज्ञा वेदों में दिखा न सके।
◆ ‘हिन्दू पैट्रियट’
‘हिंदू पोट्रयट’ ने प्रकाशित किया कि पंडित लोग यद्यपि अपने शास्त्र ज्ञान का अति गर्व करते थे, परंतु उनकी बड़ी भारी हार हुई।

इस प्रकार रूढ़िवाद के गढ़ से दयानंद की टक्कर का जो भयंकर शब्द हुआ उससे दिशाएं गूंज उठी।
— आचार्य संजय सत्यार्थी
आर्योपदेशक, पटना
📞 7717766151
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