तेरे खेल निराले प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
(तर्ज – ओम् का झंडा आया यह ओम् का झंडा आया)
तेरे खेल निराले प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
सब ने देखे भाले प्रभु जी तेरे खेल निराले।
१. सागर नदियाँ चाँद सितारे ।
जल थल अग्नि वायु सारे ।
रच कर सभी सम्भाले।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
२. एक ही मिट्टी से उपजाए।
रंग बिरंगे फूल खिलाए।
भरे शहद के प्याले।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
३. पंखुड़ियों की कतरन न्यारी।
इन में कोमलता अति प्यारी।
कहाँ बैठ तू डाले।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
४. नए खिलौने रोज़ बनाए।
कोई किसी से मेल न खाए।
इक साँचे में ढाले ।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
५. बिन हाथों के जगत बनाया।
किसी ने तेरा अन्त न पाया।
कह गए कहने वाले।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।
६. पूर्ण प्रभु हर काम है पूरा।
मगर ‘पथिक’ इनसान अधूरा।
ग़लती कहाँ निकाले।
प्रभु जी तेरे खेल निराले ।










