सदा ही सहाई
(तर्ज – दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे)
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई।
यह वो शै है जो न कभी हो पराई।
१. नहीं आज तक यह किसी ने बताया
बिना तेरे किसने यह दुनियाँ बनाई।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई……
२. जिसे खेवटों ने भंवर में फँसाया
वही नाव तूने किनारे लगाई।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई…..
३. विपत्ति में साहस निराशा में आशा
अन्धेरों में तूने ही ज्योति जलाई।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई…….
४. तुम्हारे बराबर नहीं और कोई
तुम्हें सर झुकाती है सारी ख़ुदाई।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई…..
५. जहाँ युक्तियाँ सब की नाकाम होवें
वहाँ याद तेरी सदा काम आई।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई……
६. प्रभु तेरी महिमा मैं कैसे सुनाऊँ
‘पथिक’ यह ज़बाँ तक न जाए हिलाई ।
प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई…..










