इक बाग लगाया है।

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प्रभु परमेश्वर ने संसार सजाया है।

(तर्ज-तुम रूठ के मत जाना)

१. इक बाग लगाया है।
प्रभु परमेश्वर ने संसार सजाया है।

२. दिन रात बनाये हैं।
चाँद और सूरज के दो दीप जलाये हैं।

३. अनगिनत सितारे हैं।
टिम टिम टिम करते क्या अजब नज़ारे हैं।

४. सागर इठलाता है।
लहर लहर सब को संगीत सुनाता है।

५. नदियों में पानी है।
पल पल चलना ही जीवन की निशानी है।

६. पर्बत ये सुहाने हैं।
जितने ये ऊँचे हैं उतने ही पुराने हैं।

७. धरती का ख़ज़ाना है।
कितना है धन इसमें किसने पहचाना है।

८. प्रभु पवन बहाता है।
हर इक प्राणी के प्राणों को चलाता है।

९. कोई प्रभु से महान् नहीं।
उसके बराबर भी किसी और की शान नहीं।

१०. वह सबसे निराला है।
‘पथिक’ सदा सबका प्रभु ही रखवाला है।