क्योंकि वह ओम् ओम् है
(तर्ज – यह इश्क इश्क है इश्क)
वह वह ओम् ओम् है ओम् ओम् ।
ओम् ओम् है ओम् ओम् ।
१. भगवान् की महिमा को कोई भक्त ही समझेगा।
ये दिलों की बातें हैं बाहर की नहीं बातें।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्…
२. ओम् जैसा कहीं भी दूसरा दानी न मिला।
किसे वायु किसे भोजन किसे पानी न मिला।
ओम् ही जग का पालनहार है सबका स्वामी।
कोई उसका सकल संसार में सानी न मिला।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्…
३. इनसान कभी उसको तुम जान के देखो।
पहचानने की चीज़ है पहचान के देखो।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्…
४. जब-झटके पे झटके लगें संकट के ।
तब-हर संकट को वो रख दे पलट के।
फिर-इधर उधर तू काहे को भटके।
प्रिय-ओम् ओम् बोलो तुम डट के।
क्यों मन में चिन्ता करते हो सोचो ज़रा सा
ओम् का नाम जपो निज मन से।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्…..
५. संसार के हर तार का करतार ओम् है।
दाता असीम ओम् है भर्तार ओम् है।
धरती वा आसमान का आधार ओम् है।
यह वेद ज्ञान स्त्रोत है और सार ओम् है।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्…
६. एक सब से ओम् ही नज़दीक है।
ओम् सच्चा आसरा ही ठीक है।
कामनायें सबकी सब देखा सुना करता है ओम् ।
‘पथिक’ ख़ाली झोलियाँ सबकी भरा करता है ओम् ।
क्योंकि वह ओम् ओम् है ओम् ओम्……










