हम कौन सा उपाय करें इस जहान में।

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हम कौन सा उपाय करें इस जहान में।

(तर्ज – मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता)

शेअर – हम कौन सा उपाय करें इस जहान में।
मिल जाये फिर बहार कहीं गुलिस्तान में।

प्रभो तेरी शरण तज कर शरण पाने कहाँ जायें ।
दिये दुःख दर्द दुनियाँ ने तो दीवाने कहाँ जायें।
प्रभो तेरी शरण तज कर…..

१. अगर भक्तों की भक्ति का भवन निर्माण हो जाये ।
हमारी हर तमन्ना का सफ़र आसान हो जाये ।
बहुत उलझी पड़ी उलझन को सुलझाने कहाँ जायें।
प्रभो तेरी शरण तज कर…..

२. सुना है काम आती है तुम्हारे नाम की दौलत ।
तेरे दर पर ज़माने की भला किस काम की दौलत ।
मिले मस्ती तेरे दर पर तो मस्ताने कहाँ जायें।
प्रभो तेरी शरण तज कर…..

३. जहाँ पर फूल हँसता है वहीं भँवरे भी आते हैं।
जहाँ दिलबर बसे उनका वहीं वो दिल लगाते हैं।
शमाँ जलती हो महफ़िल में तो परवाने कहाँ जायें।
प्रभो तेरी शरण तज कर…..

४. यही है आख़री मन्ज़िल यही असली ठिकाना है।
यही है देवघर अपना यही मन्दिर सुहाना है।
‘पथिक’ तेरे उपासक हैं भजन गाने कहाँ जायें।
प्रभो तेरी शरण तज कर…..