सुबह शाम सन्ध्या
सुबह शाम ईश्वर को ध्याया करो जी।
कि सन्ध्या में मन को लगाया करो जी।
उठो ब्रह्म वेला में निद्रा को त्यागो
व सौभाग्य अपना जगाया करो जी।
भ्रमण शौच मञ्जन से निवृत्त होकर
सदा शुद्ध जल से नहाया करो जी।
धुले वस्त्र धारण करो स्वच्छ तन पर
मुदित मन सदा मुस्कराया करो जी।
किसी एक निश्चित् जगह पर हमेशा
मुलायम सा आसन बिछाया करो जी।
वहाँ बैठ जाओ अचल होके सीधे
कमर को कभी न झुकाया करो जी।
बड़े प्रेम से फिर दृश्य करो बन्द आँखें
समाधी का दृश्य बनाया करो जी।
महामन्त्र गायत्री से बान्धो चोटी
विचारों को केन्द्रित बनाया करो जी।
तभी ‘शन्नो देवी’ से तीन आचमन कर
रुका कफ़ गले का हटाया करो जी।
पढ़ो ‘वाक् वाक्’ इन्द्रिय स्पर्श हेतु
निरालस्य बनकर दिखाया करो जी।
पुनः ‘भूः पुनातु’ से मार्जन के द्वारा
हर इक अंग को जल छुहाया करो जी।
ओं भूः । ओं भुवः से प्राणायाम कर के
मलिनतायें मन की मिटाया करो जी।










