यदि सौभाग्य चाहते हो

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यदि सौभाग्य चाहते हो

यदि सौभाग्य चाहते हो
तो चलना होगा नियमों पर
जो नियमों पर चलेगा
ना खाएगा वह ठोकर

ऐश्वर्य, यश, धर्म, ज्ञान व शोभा
और भग में वैराग्य भी होगा
ना पाएगा दर-दर वो कभी धोखा
प्रभु ने व्यक्ति और समाज
को दिए हैं विस्तृत काज
जो हैं नियमित नियमों पर
यदि सौभाग्य चाहते हो
तो चलना होगा नियमों पर
जो नियमों पर चलेगा
ना खाएगा वह ठोकर

उत्तम विचारों से नियमों पे चलना
मन जब भटके सतत् संभलना
बन के ही ‘तुष्टुवान’
स्तुति-भक्ति करना
प्रभु की स्तुति-उपासना से
सत्य-न्याय आदि गुण पाके
देख हर गुण में ईश्वर
यदि सौभाग्य चाहते हो
तो चलना होगा नियमों पर
जो नियमों पर चलेगा
ना खाएगा वह ठोकर

प्रभु-प्रेम भरकर गाने का अवसर
उषाकाल का समय है अनवर
अग्निहोत्र करें सप्त गुण लेकर
हमारी चित्तवृत्तियों पर
विशेष प्रभाव होगा त्वर
प्रभु के ध्यान में जाकर
यदि सौभाग्य चाहते हो
तो चलना होगा नियमों पर
जो नियमों पर चलेगा
ना खाएगा वह ठोकर

हे मेरे आत्मा ! उषा सङ्ग जागना
उज्जवल गुण-कर्म यज्ञरूप माँगना
अग्नि की आभा, हृदय में धारना
तू अग्नि की ही भान्ति चमक
बना ले खुद को नम्र-सहज
प्रभु का प्रेम जगाकर
गुणातीत गुणों को पाकर
यदि सौभाग्य चाहते हो
तो चलना होगा नियमों पर
जो नियमों पर चलेगा
ना खाएगा वह ठोकर
यदि सौभाग्य चाहते हो

ओ३म् तव॑ व्र॒ते सु॒भगा॑सः स्याम स्वा॒ध्यो॑ वरुण तुष्टु॒वांस॑: ।
उ॒पाय॑न उ॒षसां॒ गोम॑तीनाम॒ग्नयो॒ न जर॑माणा॒ अनु॒ द्यून् ॥
ऋग्वेद 2/28/2

रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई