कहीं पर जीत होती है

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कहीं पर जीत होती है

कहीं पर जीत होती है कहीं पर हार होती है ।
यही है ज़िन्दगी प्यारे जो दिन दो चार होती है ।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

१. जो पेड़ों को लगाते हैं सभी तो फल नहीं खाते,
यहाँ प्रारब्ध भी कोई चीज़ आखिरकार होती है ।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….


२. किसी भी काम में जब तक न हो मरजी विधाता की ,
बड़ी कोशिश करे कोई मगर बेकार होती है ।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

३. कभी खिलवाड़ फूलों से कभी आकाश से बातें
कभी तूफान में नैया पड़ी मँझधार होती है
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

४. यह बचपन ही सहारा है जवानी और बुढ़ापे का
अजी यह नींव है जिस पर खड़ी दीवार होती है।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

. यह जीवन एक नदिया है तो सुख दुःख दो किनारे हैं ,
ये दोनों साथ रहते हैं जहाँ जलधार होती है । ।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

६. यह दौलत नाव ही समझो जो आती और जाती है ,
कभी इस पार होती है कभी उस पार होती है ।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….

७. पथिक ‘ मंज़िल पे सब पहँचें कोई आगे कोई पीछे ,
कि हर इनसान की जग में अलग रफ़तार होती है।
कहीं पर जीत होती है कहीं पर…….