तेरे दर पर प्रभु जी हम आन खड़े तेरे दर पे।
“तेरे दर पर प्रभु जी हम आन खड़े तेरे दर पे।
तुम्हीं रक्षक हो दुनिया में सबसे बड़े ।।
सारे जग का पिता और माता है तू ।
लेने वाले सभी एक दाता हे तू।
कारीगर आदमी तेरे सर को झुका।
अपनी कारीगरी जब दिखाता है तू ।।१।।
तेरी रहमत का कोई ठिकाना नहीं।
भेद तेरा किसी ने भी जाना नहीं।
तेरी ताकत के कोई बराबर नहीं ।
कौन है वो तुझे जिसने जाना नहीं।।२।।
अपने गम की कहानी सुनाएं कहाँ ।
छोड़कर तेरा दर और जाएं कहां ।
अपने चरणों में हमको जगह दीजिए।
और जग में ठिकाना बनाएं कहां।।३।।
यूं तो दुनिया में कितने सिकंदर हुए।
तेजबल ज्ञान के जो समंदर हुए ।
एक से एक माना कि बढ़कर हुए।
पर सभी तेरी सीमा के अंदर हुए।।४।।
हम तुम्हारे पथिक हैं तुम्हारे प्रभु।
और तुम ही हो हमारे सहारे प्रभु।
हम तुम्हीं से सदा प्यार करते रहें।
बस यही एक विनती है प्यारे।।५।।
प्रभु तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े तेरे दर पर….”










